छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में पर्यटन उद्योग का योगदान
अरूण कुमार सुगंध1, डी. पी. कुर्रे2, व्ही. के. जोशी3
1शोध छात्र, डाॅ. राधाबाई शास. नवीन कन्या महाविद्यालय, रायपुर
2प्राध्यापक/निर्देशक, डाॅ. राधाबाई शास. नवीन कन्या महाविद्यालय, रायपुर
3प्राध्यापक/सहनिर्देशक, डाॅ. राधाबाई शास. नवीन कन्या महाविद्यालय, रायपुर
विश्व के प्रायः सभी देशों में पर्यटन एक प्रमुख मनोरंजन व्यवसाय है। भारत मे भी पर्यटन को दु्रत गति से विस्तार मिल रहा है। भारत के पर्यटन मानचित्र पर छत्तीसगढ़ एक उभरता हुआ राज्य है। छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य विलक्षण है। यहाॅं के प्राकृतिक, धार्मिक, पुरातात्विक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल पर्यटकों को स्वाभाविक रूप से आकर्षित करते हैं। छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध राज्य है। छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन के विकास के लिए राज्य निर्माण के बाद से बहुत तेजी से काम हुए हैं।छत्तीसगढ़ अपने आप में पर्यटन के क्षेत्र में समृद्धि की ओर बढ़ता हुआ राज्य है। यहाॅं ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक, औद्योगिक केन्द्र, प्राकृतिक सौंदर्य राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य प्राणी अभ्यारण्य के साथ-साथ गौरवशाली आदिम संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण देखने को मिलता है।
छत्तीसगढ़ एक विकासोन्मुख राज्य है, जहाॅं की अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग की विशेष भूमिका है। राज्य में समस्त प्रकार के पर्यटन स्थल प्रचुर मात्रा में अवस्थित हैं तथा इनके विकास और विस्तार की आवश्यकता है।
अध्ययन के उद्देश्य
इस शोध में छत्तीसगढ़ में पर्यटन के आर्थिक मूल्यांकन का कार्य किया गया है। इस शोध के निम्नांकित उद्देश्य हैंः-
छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं को ज्ञात करना।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अप्रत्यक्ष उपयोग मूल्य का आर्थिक मूल्यांकन करना।
पर्यटकों की प्रवासिता दर पर विभिन्न आर्थिक एवं अन्य कारकों के कार्यात्मक संबंधों को ज्ञात करना।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करना।
शोध परिकल्पना
इस अध्ययन के लिए निम्नांकित परिकल्पनाओं का निर्माण किया गया है।
1. यात्रा व्यय (ज्ब्) से प्रवासी दर (टपेपजंजपवद त्ंजम) सीधा संबंध रखती है।
2. शिक्षा का स्तर प्रवासिता दर (टत्) को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
प्राकृतिक संसाधनों से आर्थिक मूल्य के प्रकार को अगले पृष्ठ में दर्शाये गये रेखाचित्र के अनुसार बतलाया जा सकता है।
समंको का संकलन-
प्राथमिक समंक:-प्राथमिक आंकड़े प्रत्यक्ष साक्षात्कार एवं अनुसूची के माध्यम से एकत्रित किये गये हैं । इस हेतु सिस्टमेटिक दैविक निदर्शन विधि का प्रयोग किया गया है।
आकड़ों का विश्लेषण -
(1) प्रवासी दर (टपेपजंजपवद त्ंजम)ः-प्रवासी दर पर विभिन्न तत्वों को प्रभाव को जानने क लिए निम्नांकित बहुगुणी प्रतीपगमन प्रतिदर्श का प्रयोग किया गया है।
v1= a+b1x1+b2x2+b3x3+b4x4+b5x5+b6x6+b6+k
= Dk+ei
k=1
vr = प्रति पर्यटक द्वारा एक वर्ष में उस पर्यटन स्थल का कुल प्रवास दर प्रवासी दर
V1 = (Visitation Rate)
x1 = आने और जाने की कुल यात्रा लागत जिसमें यात्रा में लगा समय भी शामिल है।
x2 = पर्यटक परिवार की प्रति माह पारिवारिक आय
x3 = प्रतिस्थापित पर्यटन स्थल की यात्रा लागत
x4 = पर्यटक की आयु
x5 = पर्यटक की अधिकतम शिक्षा
x6 = परिवार का आकार
D1 = डमी चर पुरूष -1, अन्य-0
D2 = डमी चर पर्यटक -1, अन्य-0
D3=डमी चर पर्यटन सुविधायें अच्छी -1ए अन्य-0b1----b6 = स्वतंत्र चरों के तत्संबंधी प्रतीपगमन गुणांक (बीटा गुणांक)
= अनंत चर
पर्यटकों की यात्रा लागत उनकी पर्यटन प्रवृत्तियों को सबसे अधिक प्रभावित करती है। तालिका 1 में पर्यटकों का यात्रा लागत के अनुसार विभाजन दिया जा रहा है। 2000 रु से कम यात्रा लागत वाले पर्यटकों की संख्या 42.4 प्रतिशत रही है जबकि 2000-4000 रु यात्रा लागत वाले पर्यटकों की संख्या 29.6 प्रतिशत, 4000-6000 रु यात्रा लागत वाले पर्यटकों की संख्या 12 प्रतिशत, 6000-8000 रु यात्रा लागत वाले पर्यटकों की संख्या 12 प्रतिशत, 8000-10000 रु यात्रा लागत वाले पर्यटकों की संख्या 2 प्रतिशत एवं 10000-12000 रु यात्रा लागत वाले पर्यटकों की संख्या 2 प्रतिशत रही है।
पर्यटकों का यात्रा के स्थान पर उपलब्ध विकल्प के आधार पर विभाजन प्रस्तुत किया गया है यहांॅ पर यात्रा के स्थान पर उपलब्ध विकल्प से आशय वह वैकल्पिक कार्य है जो कि पर्यटक वर्तमान में यात्रा किये जाने वाले पर्यटन स्थल के स्थान पर विकल्प के रुप में करने जा सकता था। तालिका के विश्लेषण से स्पष्ट है कि कुल 250 पर्यटकों में से 144 पर्यटक मानते है कि यदि संबंधित पर्यटक स्थल का पर्यटन नहीं करते तो वे अपने कार्य पर जाना पंसद करते। इसी प्रकार 47 पर्यटक पर्यटन के स्थान पर टी.वी. देखना पंसद करते। कुल 37 पर्यटक पर्यटन के स्थान पर विकल्प के रुप में शाॅपिंग कार्य इत्यादि को पंसद करते। शेष 22 पर्यटक परिवार अन्य कार्यो को प्राथमिकता प्रदान करते।
छत्तीसगढ के पांॅचों प्रकार के पर्यटक स्थल अर्थात धार्मिक पर्यटन स्थल हेतु डोगरगढ़ का चयन किया गया है। इसी प्रकार मनोरंजन पर्यटन स्थल हेतु उर्जा पार्क, स्मारक पर्यटन स्थल हेतु सिरपुर, वन पर्यटन हेतु बारनवापारा एवं सांस्कृति पर्यटन स्थल हेतु पुरखौती मुक्तांगन का चयन किया गया है । पर्यटन स्थल में भ्रमण करने वाले इन 250 पर्यटकों के अप्रत्यक्ष उपयोग मूल्य का छत्तीसगढ़ राज्य में मूल्यांकन करने के लिये समग्र यात्रा लागत विधि ¼Aggregate Travel Cost Method½ का प्रयोग किया गया है।
विभिन्न चरों की विवरणात्मक सांख्यिकी (समग्र यात्रा लागत विधि) के द्वारा प्रस्तुत की गई है जिसमें किसी पर्यटक के द्वारा एक वर्ष की समयावधि में की गई प्रवासिता को प्रवासिता दर जो कि आश्रित चर है, पर विभिन्न निराश्रित चरों का प्रभाव ज्ञात करने के लिये । Aggregate Travel Cost माॅडल का प्रयोग किया गया है। इन निराश्रित चरों में राउंड ट्रिप कुल यात्रा लागत (टी.सी.),पारिवारिक आय (Y) स्थानापन्न पर्यटन स्थल से कुल यात्रा लागत (राउंड ट्रिप) ; (ST)आयु (A) शिक्षा ; (E) परिवार का आकार ; (FS) पुरूष/महिला ; (D1) शहरी/ग्रामीण पर्यटक ; (D2)मनोरंजक सुविधा के बारे में पर्यटक का दृष्टिकोण ; (D3) का अध्ययन किया गया है। इस हेतु प्रतीपगमन तकनीक का प्रयोग किया गया है। इन निराश्रित चरों में से अंतिम तीन कमशः ; (D1), (D2) एवं ; (D3) डमी चर हैं।
विश्लेषण से स्पष्ट है कि प्रवासिता दर का औसत मूल्य 1.84 है जबकि औसत यात्रा लागत का मूल्य 2740.82रु है औसत पारिवारि आय 56000 रु से अधिक है, पर्यटक के द्वारा वैकल्पिक पर्यटन स्थल का यात्रा लागत 4882 रु हैं। पर्यटन स्थल का भ्रमण कर रहे पर्यटकों की औसत आयु 37.76 वर्ष है। इसी प्रकार डमी चर ; (D1), (D2) एवं ; (D3) हेतु यह मूल्य क्रमशः 0.69, 0.71 एवं 0.60 प्राप्त हुआ है।छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न श्रेणी के पर्यटक स्थलों के अप्रत्यक्ष आर्थिक मूल्यांकन करते समय विभिन्न चरों का प्रवासिता दर पर पड़ने वाले प्रभाव को विश्लेषित किया गया है। विश्लेषण को तालिका 4 में दर्शाया गया है प्रतीप गमन विश्लेषण के द्वारा आश्रित चर पर स्वतंत्र चरों का प्रभाव निम्नानुसार रहा है। आश्रित चर प्रवासिता की दर है यात्रा की लागत का ऋणात्मक असर पड़ा है इसका β गुणांक -0.006 प्राप्त हुआ है। स्टुडेन्ट का ज मूल्य 7.140 है जो बताता है कि 0.001 प्रायिकता स्तर पर यह मूल्य सार्थक है। अर्थात हम कह सकते हैं कि प्रवासिता दर कुल यात्रा लागत से सीधे रुप से प्रभावित होती है तथा जैसे-जैसे यात्रा की लागत बढ़ती है पर्यटकों की प्रवास की दर कम होती जाती है। इस प्रकार हमारी परिकल्पना स्वीकार हो जाती है कि यात्रा की लागत प्रवासिता दर को प्रभावित करती है।
इसके अतिरिक्त प्रवासिता दर को पर्यटकों की आयु और परिवार का आकार भी 99 प्रतिशत सार्थकता स्तर पर धनात्मक रुप से प्रभावित करता है।
निष्कर्ष-
छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन का आर्थिक विश्लेषण करने से निम्नांकित निष्कर्ष प्राप्त हुए हैं:-
1. विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा लागत एवं प्रवासिता दर के बीच में विपरीत संबंध पाया गया है इसका गुणांक -0.006 प्राप्त हुआ है और यह 1 प्रतिशत प्रायिकता स्तर पर सार्थक है। अतः निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन स्थलों में यदि यात्रा की लागतें बढ़ती जाती है तो लोगों उन स्थलों में प्रवास घटता जाता है। जबकि घटती हुई यात्रा की लागते प्रवासिता दर को बढ़ा देती है, अतः हमारी प्रथम परिकल्पना स्वीकृत हो जाती है।
2. औसत प्रवासिता दर 1.9 और औसत यात्रा लागत 2800 प्रति व्यक्ति से भी अधिक प्राप्त हुई।
3. प्रस्तुत अध्ययन से यह निष्कर्ष सामने आता है कि धार्मिक, ऐतिहासिक इत्यादि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पर्यटन स्थलों में सड़कों स्थिति में सुधार आना चाहिये।
4. मनोरम दृश्यावली से संबंधित सुविधााओं में, सूचना प्रणाली में विस्तार और यातायात के सही संकेतक इन ग्रामीण क्षेत्रों में होने चाहिए।
REFERENCES--
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Received on 16.12.2015 Modified on 26.12.2015
Accepted on 30.12.2015 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 3(4): Oct. - Dec., 2015; Page 159-162